PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: कितने किलोवाट पर मिलती है सबसे ज्यादा सब्सिडी? और क्या है घर की छत पर सोलर लगवाने का आसान प्रोसेस? जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: बाजार में सोलर पैनल लगाने की लागत लगभग 60,000 रुपये से 80,000 रुपये प्रति किलोवाट होती है। लेकिन पीएम सूर्य घर योजना में सरकार 40% से 60% तक सब्सिडी देती है। जरूरत पड़ने पर बैंक कम ब्याज पर बिना गारंटी लोन भी उपलब्ध कराते हैं, जिससे लागत आसान हो जाती है।

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: कितने किलोवाट पर मिलती है सबसे ज्यादा सब्सिडी? और क्या है घर की छत पर सोलर लगवाने का आसान प्रोसेस? जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

(PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana/ Image Credit: Pexels)

Modified Date: May 17, 2026 / 12:46 pm IST
Published Date: May 17, 2026 12:40 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 3 kW सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक सब्सिडी
  • हर महीने लगभग 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली
  • 3–4 साल में पूरा निवेश वसूल होने की संभावना

नई दिल्ली: PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: अगर आप हर महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान हैं तो केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आपके लिए एक बड़ी राहत बन सकती है। इस योजना का मकसद लोगों को अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर सस्ती और सुलभ बिजली देना है। इसके जरिए परिवार हर महीने लगभग 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ उठा सकते हैं।

कितने किलोवाट पर कितनी सब्सिडी?

इस योजना के तहत सोलर सिस्टम की क्षमता के अनुसार सब्सिडी दी जाती है। 1 किलोवाट सिस्टम पर करीब 30,000 रुपये तक की सहायता मिलती है। 2 किलोवाट पर लगभग 60,000 रुपये तक और 3 किलोवाट या उससे अधिक पर अधिकतम 78,000 रुपये तक सब्सिडी मिलती है। 3 किलोवाट से बड़े सिस्टम पर भी सब्सिडी इसी सीमा तक सीमित रहती है।

कुल खर्च और राज्य सरकार का लाभ

बाजार में बिना सब्सिडी सोलर सिस्टम लगाने का खर्च लगभग 60,000 रुपये से 80,000 रुपये प्रति किलोवाट होता है। कई राज्यों में अतिरिक्त लाभ भी मिलता है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में राज्य सरकार की ओर से करीब 30,000 रुपये तक की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है। जिससे कुल बचत और बढ़ जाती है।

बिजली बचत और लागत वसूली का समय

अगर कोई 3 किलोवाट का सिस्टम लगवाता है तो उसकी कुल लागत करीब 1.80 लाख रुपये तक हो सकती है। केंद्र की 78,000 रुपये सब्सिडी के बाद वास्तविक खर्च लगभग 1.08 लाख रुपये रह जाता है। यह सिस्टम हर महीने 250 से 300 यूनिट बिजली पैदा करता है। जिससे सालाना करीब 25,000 रुपये से अधिक की बचत होती है। इस तरह 3 से 4 साल में पूरा खर्च निकल सकता है।

आवेदन और इंस्टॉलेशन की आसान प्रक्रिया

इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद कंज्यूमर नंबर से लॉगिन कर आवेदन किया जाता है। बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) की मंजूरी के बाद रजिस्टर्ड वेंडर से सोलर पैनल इंस्टॉल कराया जाता है। इंस्टॉलेशन के बाद नेट मीटरिंग के लिए आवेदन और निरीक्षण प्रक्रिया पूरी की जाती है।

सब्सिडी और लोन की सुविधा

इंस्टॉलेशन और मंजूरी के बाद सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाती है। इसके अलावा जिन लोगों के पास शुरुआत में लागत के लिए पैसा नहीं है। उनके लिए बैंक बेहद कम ब्याज दर पर बिना गारंटी लोन भी उपलब्ध कराते हैं। जिससे ईएमआई का बोझ कम हो जाता है और सोलर अपनाना आसान हो जाता है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।